पाम्पोर एनकाउंटर खत्म, जेके ईडीआई बिल्डिंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त

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श्रीनगर 12 अक्टूबर – आखिर पाम्पोर एनकाउंटर आज तीसरे दिन 60 घंटे बाद दोनों आतंकियों के मारे जाने और सुरक्षाबलों द्वारा चलाये गए सर्च ऑपरेशन के पूरे हो जाने के बाद ख़तम हो गया. दो आतंकियों ने सोमवार 10 अक्टूबर को सुबह 6:30 बजे श्रीनगर से लगभग 10 किमी दूर स्थित पाम्पोर में जेके ईडीआई की बिल्डिंग में प्रवेश कर के बिल्डिंग के एक हिस्से को आग लगा दी थी और बिल्डिंग में छिप कर गोलीबारी शुरू कर दी.

80 कमरों वाली इस कंक्रीट की बिल्डिंग में छुपे हुए आतंकियों को मार गिराना टेढ़ा काम था. कंक्रीट की बिल्डिंग आतंकियों के लिए कंक्रीट के बंकर का काम कर रही थी. एनकाउंटर के 24 घंटे बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बिल्डिंग पर राकेट और गोला बारूद से हमला करने का फैसला हुआ जिसके बाद बिल्डिंग लगभग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी. लेकिन आतंकियों के सफाए के लिए यह जरूरी था. रात के अँधेरे का फायदा उठा कर आतंकी कहीं निकल न भागें इसके लिए सुरक्षाबल रात भर फ़्लैश लाइट की प्रयोग करते रहे थे.

यहाँ यह बात भी उल्लेखनीय है कि आतंकियों ने इसी वर्ष फरवरी में भी इस सरकारी बिल्डिंग पर हमला किया था. उस वक़्त भी आतंकियों के सफाए में 48 घंटे का समय लगा था. आखिर क्या वजह थी कि इसी बिल्डिंग पर 8 महीने बाद आतंकियों ने फिर से हमला बोल दिया था.

omar-tweet1इस बात का जवाब पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट कर के पहले ही दे दिया है. उमर ने कहा है कि जेके ईडीआई कश्मीरी युवाओं को ट्रेनिंग प्रदान कर के उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करता था. युवाओं को सरकारी नौकरी के पीछे नहीं भागना पड़ता था. आतंकियों को यह पसंद नहीं आया. इसीलिए उन्होंने एक वर्ष में यहाँ पर दूसरी बार हमला किया है. आतंकी नहीं चाहते कि कश्मीरी युवा अपने पैरों पर खड़े हों. उन्हें लगता है कि कश्मीरी युवा परेशान रहे और आगे न बढ़ पाएं.

pdp-tweetजेके ईडीआई के मुद्दे पर पीडीपी के स्वर भी उमर जैसे ही हैं. पीडीपी का भी कहना है कि आतंकी कश्मीरी युवाओं से अपने पैरों पर खड़े होने का मौका छीन लेना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने जेके ईडीआई की बिल्डिंग पर दूसरी बार हमला किया है.

60 घंटे तक चले इस एनकाउंटर में जेके ईडीआई की बिल्डिंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई है और उसकी मुरम्मत के लिए काफी वक़्त लगेगा. तब तक ट्रेनिंग प्रोग्राम कहाँ होंगे इस बारे में अभी सपष्टता नहीं है. लेकिन लगता नहीं है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम बंद किये जायेंगे और किये भी नहीं जाने चाहिए. जो भी ट्रेनिंग प्रोग्राम अन्य स्थलों पर करवाए जा सकते हैं, जरूर जारी रखे जाने चाहिए. अन्यथा आतंकी एनकाउंटर में मारे जाने के बाद भी आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब हो गए समझिये.

देखिये इस एनकाउंटर में कैसे जेके ईडीआई की बिल्डिंग को नुक्सान पहुंचा है जिसकी मुरम्मत दिनों का नहीं महीनों का काम है.

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