डी.डी.सी. चुनावों ने जम्मू कश्मीर में सोई पड़ी राजनीति को जगा दिया, स्थानीय मुद्दों पर लड़े जायेंगे चुनाव

ब्रांड मोदी का फायदा तो मिलेगा जमीनी स्तर पर भाजपा को करनी पड़ेगी मेहनत, कई आजाद उम्मीदवार दे सकते हैं कड़ी टक्कर

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डी.डी.सी चुनावों ने गुमसुम पड़ी जम्मू कश्मीर की राजनीति में एक नई किस्म की हलचल पैदा कर दी है जहां एक तरफ पार्टियाँ और नेता इन चुनावों को लेकर उत्साहित हैं वहीं जनता में भी उत्साह की कमी नहीं है। गत कई महीनों से कोरोना महामारी के चलते छाये हुये निराशा भरे माहौल के बाद लोगों को इन चुनावों में एक आशा की किरण तो नजर आ रही है जनता इस बात को लेकर उत्साहित है कि उनके क्षेत्रों में रुके हुये विकास कार्य एक बार फिर से शुरु होंगे और उन्हें बेहतर जीवन स्तर मिल पायेगा और पार्टियाँ व नेता इस बात को लेकर ऊर्जित हैं कि धारा 370 हटने और जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद से ही हाशिये पर चली गई नेतगीरि अपने पुराने स्वरूप में वापिस आ पायेगी। अन्यथा कोई कारण नजर नहीं आता कि भूतकाल में एम.एल.ए. और मंत्री रह चुके नेता भी इन चुनावों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं लोगों में यह चर्चा भी आम है कि संभवत: विधानसभा चुनाव होने में अभी ख़ासा वक़्त लग जाएगा जिसकी वजह से राज्य में प्रथम बार डी.डी.सी. चुनाव करवाए जा रहे हैं केंद्र शासित प्रदेश में इन चुनावों के करवाने से पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनिया को भी एक सन्देश जाएगा कि जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र के सहारे ही शासन प्रशासन चल रहा है यह सन्देश इसलिए भी जरूरी है कि जम्मू कश्मीर के नाम पर अपनी रोटियां सेंकने वालों के प्रोपेगंडा पर रोक लगाईं जा सके ऐसे में इसे केंद्र सरकार का मास्टरस्ट्रोक ही कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगीunnamed

इन डी.डी.सी. चुनावों में जहाँ एक और कश्मीर की पार्टियां मिल कर चुनाव लड़ रही हैं वहीँ दूसरी तरफ जम्मू संभाग की सभी राजनितिक पार्टियाँ एकला चलो की नीति अपना रही है हर पार्टी अपने तरीके से वोटरों को लुभाने का प्रयास कर रही है जम्मू की प्रमुख राजनितिक पार्टियाँ भाजपा, कांग्रेस, पैन्थेर्स आदि अपनी अपनी फील्डिंग लगा रही हैं ताकि अधिक से अधिक सीटों पर कब्ज़ा किया जा सके हाल ही में बनी पार्टी इकजुट जम्मू भी अपनी किस्मत आजमाने निकल पड़ी है सोशल मीडिया पर जनता ने अपनी बात रखते हुए हैशटैग #4GदोVoteलो ट्रेंड चला कर जहाँ भाजपा से अपनी नाराजगी जाहिर की है वहीँ यह भी जता दिया है कि इस बार मुकाबला कठिन होने वाला है और यह चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जाने वाला है 4जी के अतिरिक्त टोल प्लाजा का मुद्दा भी इन चुनावों में भूमिका निभाएगा बिजली सड़क पानी गलियां और नालियां तो स्थानीय मुद्दे है ही लेकिन अमूमन प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट ले जाने वाली भाजपा को इस बार कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी क्यूंकि चुनाव स्थानीय मुद्दों पर होने वाला है ब्रांड मोदी का फायदा तो मिलेगा ही लेकिन लोकल स्तर पर नेताओं की परफोर्मेंस कैसी रहेगी यह तो चुनाव के नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा

उधर पार्टी का टिकट न मिलने से, राज्यभर में, नाराज नेताओं द्वारा आजाद उम्मीदवार के रूप में खड़े होने का सिलसिला भी जारी है इनमें से कई नेता तो अपने दमखम पर चुनाव की बाजी खींचने का मादा भी रखते हैं जिससे राजनितिक पार्टियों को भी चुनाव आसान नहीं लग रहे हैं ऐसे में कई आजाद उम्मीदवारों के जीतने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है जनता इस बात को बखूबी समझ रही है कि उसे उड़नखटोले में बैठने वाले नहीं जमीन से जुड़े हुए प्रतिनिधि चाहिए लेकिन जनता किसको सर माथे पर बिठाती है यह जल्द ही पता चल जाएगा बहरहाल यह माना जा सकता है कि यह डी.डी.सी. चुनाव जम्मू कश्मीर में आगामी राजनीति की दिशा तय करेंगे

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