श्रीनगर 7 मई – जम्मू कश्मीर के शोपियां में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में प्रोफेसर से आतंकी बना मोहम्मद रफी भट्ट को सेना ने रविवार दोपहर मार गिराया। सेना के हाथों मरने से पहले भट्ट ने अपने पिता से फोन पर बात कर कहा था कि अगर मैंने आपको दुख पहुंचाया हो, तो मुझे माफ कर देना। पिता फयाज मोहम्मद भट्ट के लिए बेटे का दिन का पहला और आखिरी कॉल था। पिछले सप्ताह शुक्रवार को भट्ट लापता हो गया था, जिसके बाद पता चला कि उसने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन ज्वॉइन कर लिया है।

दक्षिण कश्मीर के शोपियां में सेना के हाथों मरने से पहले फोन पर बात कर भट्ट ने अपने पिता से कहा, ‘अगर मैंने आपको दुख पहुंचाया हो, तो मुझे माफ कर देना और मैं अल्लाह से मिलने जा रहा हूं, इसलिए यह मेरा आखिरी कॉल है।’ भट्ट के पिता ने पुलिस से बात करते हुए कहा कि उसने अपने बेटे आखिरी बार आज बात की थी और यह भी कहा था कि वो पुलिस को सरेंडर दें, लेकिन वो नहीं माना। सेना ने प्रोफेसर से आतंकी बने डॉक्टर मुहम्मद रफी भट से सरेंडर करने के लिए भी कहा था। पुलिस प्रोफेसर से आतंकी बने भट्ट के हर कॉल और उसके ठिकाने का पता लगाने की कोशिश कर रही थी। यहां तक कि परिवार वालों की भी मदद ली गई, ताकि वो वापस लौट आए, लेकिन प्रोफेसर ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया था। हिजबुल के बहकावे में आकर मारा गया 33 साल का भट्ट कश्मीर यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी का प्रोफेसर था। भट्ट के आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद उसके पिता लगातार पुलिस को कह रहे थे कि उनका बेटा हथियार नहीं पकड़ सकता।

फयाज अहमद भट्ट भी 1990 के दशक के शुरू में आतंकवादी संगठन के लिए एक अंडरग्राउंड काम कर चुका है। 18 साल की उम्र में मोहम्मद रफी भट्ट पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में जाने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस ने उसको वापस लाकर उसके माता-पिता को सौंप दिया था।

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