श्रीनगर 9 मई – श्रीनगर में पहली बार ऐसा हुआ कि पत्थरबाजी की वजह से एक पर्यटक की मौत हुई है। इस घटना के बाद सीएम महबूबा मुफ्ती ने हॉस्पिटल जाकर मृतक के परिजन से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा- यह बहुत ही दुखद है, मेरा सिर शर्म से झुक गया है। पुलिस के मुताबिक हादसा सोमवार सुबह शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर नरबल इलाके में हुआ। तमिलनाडु के एक पर्यटक आर थिरुमणि (22) का पत्थर लगने से सिर फूट गया और उसने हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने अज्ञात पत्थरबाजों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। ऐसे में आपको उस मीडिया रिपोर्ट के बारे में बताते हैं जिसमें खुलासा हुआ था कि जम्मू-कश्मीर के पत्थरबाजों को बकायदा सैलरी मिलती है। इसके अलावा एक आकड़ा दिखाते हैं जिसमें पता चलता है कि पिछले तीन सालों में जम्मू-कश्मीर में हर दिन पत्थरबाजी की पांच घटनाएं हुईं।

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पत्थरबाजी में मारा गया चेन्नई का २२ वर्षीय थिरुमणि
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मारे गए टूरिस्ट थिरुमणि के पिता

पत्थरबाजों को मिलती है सैलरी: स्टिंग

इंडिया टुडे ने बारामूला जिले में पांच प्रदर्शनकारियों (पत्थरबाज) का स्टिंग किया था। जिसमें उन्होंने हिडन कैमरे के सामने बताया था कि उन्हें पत्थर फेंकने के हर महीने पांच से सात हजार रुपए मिलने हैं। इसके अलावा अलग से कपड़े और जूते भी दिए जाते हैं। पांचों में से एक पत्थरबाज ने कहा कि पेट्रोल बम फेंकने के लिए अलग से 500 से 700 तक रुपये मिलते है। उन्होंने फायनेंसर की पहचान बताने से मना कर दिया था।

‘9 साल से फेंक रहा पत्थर’
टीवी स्टिंग में एक पत्थरबाज ने बताया था कि वो 9 साल से पत्थर फेंकने का काम कर रहा है। उसने ये भी खुलासा किया कि वो और उसके साथी हर महीने पत्थरबाजी से 10 से 11 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। पैसे लेकर ये कहीं भी पत्थर फेंकने के लिए तैयार रहते हैं।

पत्थरबाजों पर IB की रिपोर्ट
अप्रैल 2017 में IB ने एक रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने घाटी में अशांति फैलाने के लिए सैयद अली शाह गिलानी समेत कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को 800 करोड़ रुपये दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई द्वारा दिए गए पैसे का इस्तेमाल पत्थर और पेट्रोल बम फेंकने के लिए किया गया।

3 साल में पत्थरबाजी की 4,799 घटनाएं
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहिर ने बताया था कि 2015 में पत्थरबाजी की 730 घटनाएं हुईं। उन्होंने राज्यसभा में बताया था कि साल 2015 से लेकर 2017 तक 4799 पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं। यानी एक दिन में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की पांच घटनाएं हुईं। इसके अलावा पिछले तीन सालों में जम्मू-कश्मीर में 872 आतंकी घटनाएं घटीं।
– उन्होंने राज्यसभा को बताया था कि राज्य में पिछले तीन सालों में मारे गए आतंकियों की कुल संख्या 471 थी, जबकि सुरक्षा बल के 201 जवान शहीद हो गए। इस दौरान 72 नागरिक भी मारे गए थे।

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